Giridih जिले के डुमरी विधानसभा क्षेत्र से झारखंड लोक क्रांति मोर्चा (JLKM) के विधायक Jairam Mahato ने अब कोयला मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। इसके लिए उन्होंने भारतीय क्रांतिकारी मजदूर संघ नामक एक नए संगठन का गठन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों की आवाज़ को सशक्त और प्रभावी ढंग से उठाना होगा।
धनबाद सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेसवार्ता में जयराम महतो ने इस संगठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोयला मजदूर लंबे समय से अपनी समस्याओं और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ सरकार और प्रशासन तक उतनी मजबूती से नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति को बदलने और मजदूरों के लिए ठोस नीतिगत सुधार लाने के लिए यह संगठन काम करेगा।
संगठन का विस्तार और रणनीति
विधायक महतो ने बताया कि संगठन की संरचना राज्यव्यापी होगी। इसके तहत झारखंड के सभी जिलों में जाकर कमेटियों का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है, ताकि मजदूरों के लिए एक संगठित मंच तैयार हो सके।
महतो के अनुसार, संगठन न केवल मजदूरों की वेतन, सुरक्षा और कल्याण योजनाओं से जुड़ी मांगों को उठाएगा, बल्कि कोयला क्षेत्र में हो रहे ठेका प्रथा के दुरुपयोग और मजदूरों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ बुलंद करेगा। उन्होंने साफ किया कि यह संगठन मजदूरों के लिए एक दबाव समूह के रूप में भी काम करेगा, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
सूर्य नारायण हंसदा मामले पर बयान
प्रेसवार्ता के दौरान विधायक जयराम महतो ने सूर्य नारायण हंसदा से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को उम्मीदवार की तलाश थी और उस समय सूर्य नारायण हंसदा को टिकट दिया गया क्योंकि उन्होंने पहले बीजेपी से चुनाव लड़ा था।
महतो ने कहा कि पार्टी को हंसदा की कथित नक्सली पृष्ठभूमि के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। “यदि हमें उनकी गतिविधियों के बारे में पहले से पता होता तो पार्टी का निर्णय अलग हो सकता था,” उन्होंने स्पष्ट किया।
आदिवासी नेतृत्व और नक्सलवाद पर चिंता
जयराम महतो ने राज्य और देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि झारखंड में एक आदिवासी मुख्यमंत्री और देश में एक आदिवासी राष्ट्रपति होने के बावजूद, आदिवासी समाज नक्सलवाद से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है।
उन्होंने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि नक्सलवाद की जड़ें अब भी आदिवासी इलाकों में मौजूद हैं, जो विकास और शांति के रास्ते में बाधा बन रही हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस समस्या के समाधान के लिए व्यापक नीति और ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आदिवासी समाज मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल हो सके।
मजदूरों के हक की जंग का आगाज़
विधायक महतो का यह कदम कोयला क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। धनबाद, गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जैसे जिले, जो कोयला खनन के प्रमुख केंद्र हैं, वहां इस संगठन के सक्रिय होने से मजदूरों की आवाज़ और तेज होगी।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि “भारतीय क्रांतिकारी मजदूर संघ” मजदूरों के हक की इस लड़ाई को किस तरह अंजाम देता है और कोयला उद्योग से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को किस प्रकार हल करने की दिशा में कदम उठाता है।
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