
जमशेदपुर (झारखंड)
जमशेदपुर से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बैंक खाते में पर्याप्त धन होने के बावजूद एक सेवानिवृत्त शिक्षिका को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उनकी मौत हो गई। इस घटना ने बैंकिंग सिस्टम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोनारी क्षेत्र की रहने वाली सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस के बैंक खाते में लगभग 25 लाख रुपये जमा थे। बावजूद इसके, इलाज के लिए पैसों की व्यवस्था समय पर नहीं हो पाई। कारण था—खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज न होना।
इलाज की सलाह मिली, लेकिन प्रक्रिया ने रोक दिया रास्ता
अंजलि बोस की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी। परिवार इलाज के लिए धन निकालना चाहता था, लेकिन बैंक ने कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए तत्काल राशि देने से इनकार कर दिया।
परिजन अस्पताल और बैंक के बीच कई दिनों तक चक्कर लगाते रहे। छोटी बहन गायत्री बोस अपनी बहन की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करती रहीं, लेकिन नियमों की जटिलता के आगे मानवीय जरूरत हार गई।
मौत के बाद पहुंची मदद
मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह ने हस्तक्षेप किया और जिला प्रशासन से संपर्क साधा। उपायुक्त के निर्देश पर बैंक अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे अंजलि बोस का निधन हो गया। बैंक अधिकारी इलाज के लिए पैसा लेकर लगभग दो घंटे बाद अस्पताल पहुंचे, जब जीवन पहले ही समाप्त हो चुका था।
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। बैंक अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कहते हुए माफी मांगी, लेकिन सवाल अब भी कायम है—
क्या नियम इंसान की जान से ज्यादा बड़े हो गए हैं?
क्या आपात स्थिति में भी बैंकिंग सिस्टम इतना असंवेदनशील रह सकता है?
यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां कागजी प्रक्रियाएं जीवन से ऊपर रख दी जाती हैं।

