करमटोली स्थित धूमकुडिया भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सरना समिति के महिला अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि भारत में आदिवासी प्रथम नागरिक हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हजारों कुर्बानियां दीं. मगर आज राजनीतिक स्वार्थ के लिए आदिवासी समाज को भटकाया जा रहा है. कुड़मी, कुरमी और महतो तीनों एक ही हैं, कभी भी आदिवासी नहीं थे. यदि इन्हें आदिवासी दर्जा दिया गया तो पूरे देश में आदिवासी अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन की रूपरेखा तय हो चुकी है 20 सितंबर को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया जाएगा. साथ ही 17 अक्टूबर को जिला उपायुक्त कार्यालय का घेराव कर आदिवासी जमीन लूट और विस्थापन के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

