रांची के रिम्स (RIMS) में MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का नामांकन फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के कारण रद्द कर दिया गया है। छात्रा काजल ने अनुसूचित जाति (SC) कोटे से सीट हासिल की थी, लेकिन जांच में पता चला कि उसने फर्जी जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया था।
कैसे हुआ मामला सामने?
रिम्स प्रबंधन ने दस्तावेजों की पड़ताल की तो पाया कि काजल के NEET UG 2025 के एडमिट कार्ड और स्कोर कार्ड में उसकी कैटेगरी OBC (NCL) दर्ज है। इसके बावजूद उसने SC रैंक 1 के आधार पर MBBS सीट ले ली थी।
जब उससे एडमिट कार्ड की असली कॉपी मांगी गई, तो उसने कार्ड खो जाने की बात कही। इसी से शक और बढ़ गया।
जाति प्रमाणपत्र की जांच में खुली पोल
रिम्स ने 13 अक्टूबर को प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए JCECEB और गिरिडीह सीओ को पत्र भेजा।
जांच में पाया गया कि छात्रा का SC प्रमाणपत्र भैरो नामक खतियानी परिवार के आधार पर जारी किया गया था, लेकिन उसका इस परिवार से कोई भी संबंध नहीं था।
यह भी सामने आया कि छात्रा की प्रस्तुत वंशावली पूरी तरह गलत थी।
रिम्स ने लिया कड़ा निर्णय
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद रिम्स प्रबंधन ने 20 नवंबर को काजल को निलंबित कर दिया और 21 नवंबर को शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए समिति गठन की।
रिम्स ने स्पष्ट किया कि फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर मिला कोई भी प्रवेश शुरू से ही अवैध माना जाता है। यह वास्तविक SC अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अब अगली पात्र SC अभ्यर्थी को मिलेगा प्रवेश
रिम्स JCECEB को पूरा मामला भेजकर अगली पात्र SC अभ्यर्थी को MBBS सीट देने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

