रांची:
झारखंड विधानसभा के रजत जयंती समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के निर्माण में लगे लंबे संघर्ष और जनआंदोलन को याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के केंद्र में रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन (गुरुजी) और अन्य संघर्षवीरों की भूमिका हमेशा प्रेरणादायक रहेगी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि राज्य निर्माण में योगदान देने वाले कई महान लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच और संघर्ष ही झारखंड की पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 साल पूरे होने के बाद भी झारखंड को गरीबी, कुपोषण, शिक्षा की कमी और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियों से लड़ना है। उन्होंने माना कि राज्य गठन के बावजूद कई बुनियादी सूचकांकों में झारखंड आज भी पिछड़ा हुआ है और इसे बदलना सरकार की प्राथमिकता है।
सोरेन ने लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून को हर नागरिक तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आम लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, न सिर्फ तब जब वे किसी अन्याय का सामना करें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार गांवों और शहरी क्षेत्रों में विशेषकर महिलाओं को आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना और ‘सेवा का अधिकार’ कार्यक्रम इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा की रजत जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य के विकास की नई यात्रा की शुरुआत है। आने वाले समय में सरकार की नीतियों और योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुंचाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होगा।

