बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने सभी राजनीतिक अनुमान बदल दिए हैं।
पहले चरण की 121 सीटों पर जहां 2020 में एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर थी, वहीं इस बार परिणाम एकतरफा रहे।
एनडीए ने पहले चरण में 103 सीटों पर जीत दर्ज कर महागठबंधन को सिर्फ 18 सीटों पर सीमित कर दिया।
पहले चरण की सीटें—एनडीए के लिए सबसे मुश्किल मानी जा रही थीं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि 2020 की तरह इस बार भी पहले चरण की सीटों पर महागठबंधन मजबूत स्थिति में रह सकता है।
पिछले चुनाव में 121 सीटों में से महागठबंधन ने 61 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए को 59 मिली थीं।
लेकिन 2025 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और एनडीए ने रिकॉर्ड बढ़त बना ली।
दूसरे चरण की 122 सीटों पर भी एनडीए का दबदबा
दूसरे चरण में हुए 122 सीटों के चुनाव में एनडीए ने 99 सीटें (81%) हासिल कीं।
महागठबंधन को 17, एआईएमआईएम को 1 और बसपा को 1 सीट पर जीत मिली।
2020 की तुलना करें तो दूसरे चरण में भी इस बार एनडीए का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा।
तब एनडीए को 66 और महागठबंधन को 49 सीटें मिली थीं।
2020 बनाम 2025: कैसे बदल गया पूरा चुनावी समीकरण?
2020 के विधानसभा चुनाव में बेहद करीबी मुकाबला था—
एनडीए – 125 सीट
महागठबंधन – 110 सीट
लेकिन 2025 के चुनाव में दोनों चरणों का पैटर्न बिल्कुल उलट रहा।
जिन जिलों में पहले एनडीए को कम सीटें मिलती थीं, इस बार वहीं से सबसे ज्यादा फायदा मिला।
पहले चरण में जिन जिलों में मतदान हुआ
गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, वैशाली, नालंदा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, शेखपुरा, बेगूसराय, लखीसराय, दरभंगा, सहरसा, खगड़िया, मधेपुरा।
दूसरे चरण के प्रमुख जिले
पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर।
निष्कर्ष
2025 का चुनाव साफ संदेश देता है कि दोनों चरणों में—
पहला चरण: 85% सीटें एनडीए के खाते
दूसरा चरण: 81% सीटें एनडीए के खाते
राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले, और जहां 2020 में महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, इस बार एनडीए ने दोनों चरणों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।

