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Sunday, December 14, 2025

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में MBBS एडमिशन को लेकर विवाद, 50 में से 42 मुस्लिम छात्रों के चयन पर BJP और हिंदू संगठनों ने उठाए सवाल

 

जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में MBBS के पहले बैच की एडमिशन सूची सामने आते ही बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कुल 50 सीटों में से 42 मुस्लिम और 8 हिंदू छात्रों के चयन के बाद BJP, VHP और बजरंग दल ने कड़ा विरोध जताया।

विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि यह मेडिकल कॉलेज माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आर्थिक सहायता से चलता है, इसलिए इसमें हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।

BJP की आपत्ति: “दान हिंदुओं का है, लाभ भी हिंदुओं को मिलना चाहिए”

BJP नेता सुनील शर्मा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर एडमिशन सूची पर आपत्ति दर्ज कराई। शर्मा ने कहा कि:

“श्राइन बोर्ड में दिया गया दान हिंदुओं का है, इसे हिंदुओं की भलाई में लगना चाहिए।”

“प्रवेश उन्हीं को मिलना चाहिए जिनकी माता वैष्णो देवी में आस्था है।”

उन्होंने इस वर्ष की एडमिशन सूची को अस्वीकार्य बताया और नियमों में बदलाव की मांग की।

कुछ संगठनों ने तो कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्थान घोषित करने की मांग तक कर दी, ताकि धर्म आधारित आरक्षण लागू किया जा सके।

प्रशासन का जवाब: “कॉलेज सेक्युलर है, प्रवेश केवल मेरिट के आधार पर”

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि:

कॉलेज को माइनॉरिटी इंस्टीट्यूट का दर्जा नहीं है।

यहां धर्म के आधार पर कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

सभी एडमिशन NEET मेरिट के आधार पर ही किए गए हैं।

सीएम उमर अब्दुल्ला का पलटवार: “धर्म के आधार पर प्रवेश देना असंवैधानिक”

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विरोध प्रदर्शनों को गैर-संवैधानिक और अनुचित बताया।

उन्होंने कहा:

“अगर आप बिना मेरिट प्रवेश चाहते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर आएं।”

“संविधान सेक्युलर है—अगर यह पसंद नहीं, तो इसे हटाने की बात करें।”

“धर्म के आधार पर न तो प्रवेश हो सकता है, न ही सरकारी नौकरी।”

उमर ने यह भी पूछा कि अगर दान से बने संस्थानों में धर्म के आधार पर प्रवेश देना शुरू हो गया, तो क्या अस्पतालों में इलाज भी धर्म देखकर होगा?

विवाद के तीन मुख्य मुद्दे

दान का उपयोग: क्या श्राइन बोर्ड के फंड का लाभ केवल हिंदुओं को मिलना चाहिए?

धर्म आधारित प्रवेश: क्या किसी सार्वजनिक मेडिकल कॉलेज में यह संभव है?

मेरिट बनाम धार्मिक प्राथमिकता: संवैधानिक और सामाजिक टकराव।

फिलहाल प्रशासन ने कहा है कि प्रवेश सूची में कोई बदलाव नहीं होगा, जबकि BJP और हिंदू संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।

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