धनबाद:
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना इन दिनों झारखंड में गंभीर संकट से गुजर रही है। भ्रष्टाचार, प्रशासनिक दबाव और मनमानी के कारण राज्य के अधिकांश अस्पतालों में यह योजना लगभग ठप हो चुकी है। इसका सीधा असर लाखों गरीब परिवारों पर पड़ रहा है, जो अब मुफ्त इलाज से वंचित हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ अफसरों की मनमानी और अनावश्यक जांच के चलते अस्पताल संचालक परेशान हैं। भुगतान में देरी और प्रशासनिक अड़चनों से तंग आकर कई अस्पताल अब आयुष्मान कार्ड से इलाज करने से मना कर रहे हैं। इससे उन गरीब मरीजों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इस योजना पर निर्भर थे।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वे सरकार से सहयोग चाहते हैं, लेकिन फाइलों में लटके भुगतान और बार-बार के निरीक्षण ने उन्हें योजना से दूर कर दिया है। वहीं, मरीजों का कहना है कि “हमारे पास इलाज के पैसे नहीं हैं, अस्पताल वाले आयुष्मान कार्ड मान नहीं रहे — अब जाएं तो जाएं कहाँ?”
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर स्वास्थ्य संकट पर राज्य के जनप्रतिनिधियों – सांसदों और विधायकों – की चुप्पी बनी हुई है। जनता सवाल पूछ रही है कि जब गरीबों की जान दांव पर लगी है, तब उनके नेता खामोश क्यों हैं?
झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर मंडरा रहे इस संकट ने न सिर्फ सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि सिस्टम की खामियों का सबसे बड़ा शिकार गरीब जनता ही बनती है।

