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Saturday, February 14, 2026

झारखंड के राजमहल में आदिवासियों का महाकुंभ, गंगा स्नान को उमड़े श्रद्धालु

Tribal Mahakumbh 2026: राजमहल गंगाघाट पर आदिवासियों का महाकुंभ, हजारों श्रद्धालु शामिल

राजमहल (साहिबगंज):

झारखंड के राजमहल में 1 फरवरी 2026 को आदिवासियों का भव्य महाकुंभ आयोजित किया जा रहा है। माघी पूर्णिमा के अवसर पर गंगा घाट आदिवासी आस्था और परंपरा का बड़ा केंद्र बन गया है। झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और नेपाल से हजारों श्रद्धालु यहां गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे हैं।

गंगा स्नान से शुरू होती है पूजा

पूर्णिमा से पहले ही श्रद्धालु गंगाघाट पर स्नान कर गंगा पूजन करते हैं। इसके बाद वे जल लेकर अपने-अपने अखाड़ों में पहुंचते हैं और मरांग बुरू (भगवान शिव स्वरूप) की आराधना करते हैं। पूरे विधि-विधान से पूजा, भजन और पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

200 से ज्यादा अखाड़े, दिन-रात पूजा

मेला क्षेत्र में करीब 200 से अधिक छोटे-बड़े अखाड़े लगाए गए हैं। हर अखाड़े में लगातार भजन, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। यह आयोजन आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, एकता और परंपरा को मजबूत करता है।

कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु

इस महाकुंभ में झारखंड के साथ-साथ बिहार, बंगाल, ओड़िशा और नेपाल से भी धर्मगुरु और उनके अनुयायी शामिल होते हैं। आदिवासी समाज इस आयोजन को अपना महाकुंभ मानता है और हर साल इसमें शामिल होना सौभाग्य समझता है।

आस्था और संस्कृति का संगम

राजमहल का गंगाघाट कुछ दिनों के लिए आदिवासी आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक है।

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