रांची: झारखंड में इस बार सर्दी ने समय से पहले दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तर-पश्चिमी हिमालय श्रृंखला में बर्फबारी हो रही है, और वहीं से आने वाली बर्फीली हवाएं अब झारखंड तक पहुंच रही हैं। आसमान साफ रहने और दिन में धूप निकलने के बावजूद इन हवाओं से कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है।
झारखंड में आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में ठंड का प्रकोप बढ़ता है, लेकिन इस बार नवंबर के दूसरे सप्ताह से ही तापमान में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। लातेहार राज्य का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार ठंड की तीव्रता में ला-नीना प्रभाव की भी भूमिका है। प्रशांत महासागर के पेरू तट पर बनने वाला यह प्राकृतिक प्रभाव एशिया के कई हिस्सों में ठंड और बारिश बढ़ा देता है। विभाग का अनुमान है कि नवंबर से फरवरी तक झारखंड में ठंड का असर सामान्य से अधिक रहेगा।
अगले 24 घंटे में राज्य के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट की संभावना जताई गई है। रांची, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों में शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की गई है। सुबह के समय कई क्षेत्रों में घना कुहासा छाया रहेगा।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. डी.एस. श्रीवास्तव ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। उन्होंने कहा —
“कहीं गर्मी समय से पहले बढ़ रही है, तो कहीं ठंड जल्दी शुरू हो रही है। ला-नीना के कारण न केवल ठंड बढ़ी है बल्कि फसल चक्र और फूल खिलने के मौसम में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है।”
झारखंड में इस साल की सर्दी अब तक की सबसे कड़ी ठंड का संकेत दे रही है।

