पटना/दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर उठ रही अंदरूनी खींचतान अब खुले संघर्ष में बदल गई है। लालू प्रसाद यादव के परिवार में हालिया घटनाओं ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
सबसे पहले रोहिणी आचार्य ने पार्टी की हार के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी नाराज़गी जताई। उन्होंने सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी व राज्यसभा सांसद संजय यादव को निशाना बनाते हुए कहा कि पार्टी की हार और परिवार में अशांति के लिए वही जिम्मेदार हैं। रोहिणी ने दावा किया कि लालू प्रसाद को दान की गई उनकी किडनी को लेकर उनके सामने ही आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जिससे वह बहुत आहत हुईं और उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
विवाद बढ़ने पर रोहिणी आचार्य अपने बच्चों के साथ दिल्ली चली गईं, और लगातार सोशल मीडिया पर परिवार और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखती रहीं। इसके बाद लालू यादव की तीन और बेटियां—रागिनी, चंदा और राजलक्ष्मी—भी अपने बच्चों के साथ पटना का पैतृक घर छोड़कर दिल्ली शिफ्ट हो गईं।
राजद में परिवारिक संघर्ष नया नहीं है। दो दशक पहले लालू शासन पर साधु यादव और सुभाष यादव के प्रभाव को लेकर बड़े विवाद खड़े हुए थे। अब उसी तरह की स्थिति तेजस्वी यादव की टीम और उनके करीबी सहयोगियों को लेकर बनती दिख रही है।
लालू प्रसाद ने 2015 में अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को पार्टी का चेहरा बनाया था, जबकि बड़े बेटे तेज प्रताप और बेटी मीसा भारती राजनीतिक रूप से अधिक अनुभवी माने जाते थे। महागठबंधन सरकार के दौरान तेजस्वी उपमुख्यमंत्री बने और तेज प्रताप को मंत्री बनाया गया, लेकिन दोनों के बीच राजनीतिक और निजी मतभेद लगातार सामने आते रहे।
2020 के विधानसभा चुनाव से पहले तेज प्रताप और ऐश्वर्या राय के तलाक विवाद ने भी पार्टी और परिवार को परेशान किया। मई 2025 में तलाक केस के बीच तेज प्रताप की एक नई फोटो वायरल हुई, जिसके बाद लालू प्रसाद ने उन्हें छह साल के लिए RJD से निष्कासित कर दिया।
परिवार की लगातार बढ़ती दूरी और पार्टी में बिगड़ती स्थिति ने RJD के भीतर गहरे संकट की ओर संकेत दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर मतभेद जल्द नहीं सुलझाए गए, तो इसका असर पार्टी के भविष्य पर सीधा पड़ेगा।

