झारखंड के बहुचर्चित गुरुदास चटर्जी हत्याकांड में बड़ा फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने सोमवार को इस केस के दोषी उमेश सिंह को जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया। उमेश सिंह 27 अप्रैल 2000 से जेल में बंद है और करीब 30 साल 7 महीने की सजा काट चुका है (अवकाश काल को छोड़कर)।
हाईकोर्ट का आदेश
जस्टिस अंबुज नाथ की अदालत ने उमेश सिंह की क्रिमिनल रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को उसकी रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के एडवाइजरी बोर्ड ने पहले तीन बार उसकी रिहाई अर्जी खारिज की थी।
इसी फैसले को चुनौती देकर उमेश ने 17 जून 2025 को हाईकोर्ट की शरण ली थी।
क्या था मामला?
14 अप्रैल 2000 को निरसा के तत्कालीन विधायक और वर्तमान विधायक अरूप चटर्जी के पिता गुरुदास चटर्जी धनबाद से लौट रहे थे।
इस दौरान गोविंदपुर के पास देवली प्रीमियम हार्डकोक के पास दोपहर करीब 2:45 बजे बाइक से आए शिव शंकर सिंह और उमेश सिंह ने उन पर फायरिंग की थी।
आरोप था कि हत्या की साजिश शिव शंकर के पिता नर्मदेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ चोरा मास्टर ने रची थी।
कोर्ट की कार्रवाइयों का पूरा रिकॉर्ड
2003: सेशन कोर्ट ने शिव शंकर, उमेश, नर्मदेश्वर और विजय सिंह सभी को दोषी ठहराया
2005 (हाईकोर्ट): शिव शंकर और उमेश की उम्रकैद को फांसी की सजा में बदला गया
नर्मदेश्वर और विजय सिंह को बरी किया गया
सुप्रीम कोर्ट: फांसी की सजा को पलटकर फिर से उम्रकैद में बदल दिया
2018: शिव शंकर की सजा माफ की गई
2025: अब उमेश सिंह की रिहाई का आदेश
इसके साथ ही लगभग 24 साल जेल में रहने के बाद उमेश सिंह जल्द ही बाहर आएगा।

