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Saturday, February 14, 2026

पेसा के नाम पर आदिवासियों को गुमराह कर रही है सरकार: रघुवर दास

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रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पेसा कानून को लेकर सरकार पर सवाल उठाते पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास

Highlights

  1. पेसा नियमावली को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप
  2. आदिवासी परंपरागत व्यवस्था को कमजोर करने का दावा
  3. ग्रामसभा की परिभाषा पर उठे सवाल
  4. संसाधनों पर अधिकार को लेकर स्पष्टता नहीं
  5. सरकार से नियमावली में सुधार की मांग

रांची:

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पेसा (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र) अधिनियम की प्रस्तावित नियमावली को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी समाज को अधिकार देने के बजाय केवल दिखावे की राजनीति कर रही है।

प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान रघुवर दास ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे संवैधानिक संरक्षण देकर मजबूत बनाना है। लेकिन सरकार द्वारा तैयार नियमावली इस उद्देश्य से भटकती हुई नजर आती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नई नियमावली में ग्रामसभा की परिभाषा को सीमित कर दिया गया है, जिससे परंपरागत जनजातीय नेतृत्व और सामाजिक ढांचे की अनदेखी हो रही है। जबकि पेसा अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ग्रामसभा का गठन और संचालन स्थानीय परंपराओं के अनुसार होना चाहिए।

रघुवर दास ने संथाल, हो, मुंडा, उरांव, खड़िया और भूमिज समुदायों की पारंपरिक ग्राम नेतृत्व प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये व्यवस्थाएं सदियों से आदिवासी समाज का आधार रही हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या नई नियमावली के तहत ग्रामसभा का नेतृत्व ऐसे लोगों को सौंपा जाएगा, जिनका पारंपरिक जनजातीय व्यवस्था से कोई संबंध नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने लघु खनिज, बालू घाट, वन उत्पाद और जल स्रोतों पर ग्रामसभा के वास्तविक अधिकार को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पेसा नियमावली को आदिवासी समाज की भावना और कानून की मूल आत्मा के अनुरूप संशोधित कर जल्द लागू किया जाए।

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