भारत सरकार ने देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माने जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार यहां चार लाइन रेलवे ट्रैक और भूमिगत रेल नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है।
Highlights:
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि यह अंडरग्राउंड रेलवे लाइन करीब 20 से 24 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। यह परियोजना टिन माइल हाट से रंगापानी तक फैले लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र में विकसित की जाएगी।
🚆 जमीन के नीचे रेलवे क्यों जरूरी?
चिकन नेक भारत को उसके आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला इकलौता जमीनी रास्ता है। युद्ध या आपदा की स्थिति में यह इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। मौजूदा सड़क और रेल नेटवर्क जमीन के ऊपर हैं, जो ड्रोन, मिसाइल या एयर स्ट्राइक में आसानी से प्रभावित हो सकते हैं।
अंडरग्राउंड रेलवे: ✔️ हमलों से ज्यादा सुरक्षित
- ✔️ सैटेलाइट से पहचानना मुश्किल
- ✔️ युद्ध में भी सप्लाई चेन चालू रखेगी
- ✔️ सेना, हथियार, ईंधन और राशन तेजी से पहुंचा सकेगी
- 🌏 चीन और बांग्लादेश क्यों घबराए?
चीन पहले ही चुम्बी वैली और अरुणाचल के पास बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुका है। वहीं बांग्लादेश में हाल की राजनीतिक अस्थिरता और सिलीगुड़ी के पास एयरबेस गतिविधियों ने भारत की चिंता बढ़ाई थी।
लेकिन अब भारत के इस अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क से: ➡️ चिकन नेक पर किसी भी दबाव की रणनीति कमजोर होगी
➡️ पूर्वोत्तर भारत की सैन्य और नागरिक सप्लाई सुरक्षित रहेगी
➡️ भारत की रणनीतिक बढ़त मजबूत होगी
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत की टनलिंग क्षमता और रणनीतिक सोच का बड़ा उदाहरण है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है।

