बेंगलुरु में बिहार-झारखंड की संस्कृति का भव्य संगम
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बिहार और झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर जीवंत नजर आई, जब ज्योति होप फाउंडेशन की ओर से दूसरे मकर संक्रांति महोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 1 फरवरी 2026 को एचएसआर लेआउट स्थित समर्थनम प्रेक्षा गृह में उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
इस आयोजन में बेंगलुरु में रह रहे बिहार और झारखंड के प्रवासी समाज ने बड़ी संख्या में भाग लिया। महोत्सव ने परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता को एक मंच पर जोड़ने का कार्य किया।
विशिष्ट अतिथियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
कार्यक्रम में झारखंड की प्रतिष्ठित संस्था रांची सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े अनिरुद्ध सिंह और कर्नाटक के पूर्व पुलिस महानिदेशक असित मोहन प्रसाद विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। मूल रूप से झारखंड से जुड़े असित मोहन प्रसाद की उपस्थिति ने आयोजन को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से और भी खास बना दिया।
लोकनृत्य और गीतों ने मोहा मन
महोत्सव का मुख्य आकर्षण बिहार और झारखंड की लोकसंस्कृति पर आधारित रंगारंग प्रस्तुतियां रहीं। भोजपुरी और मिथिला लोकगीतों के साथ झारखंड के नागपुरी नृत्य ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कर्नाटक में कार्यरत युवतियों द्वारा प्रस्तुत नागपुरी नृत्य ने यह साबित कर दिया कि प्रवासी समाज अपनी जड़ों से आज भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
सम्मान समारोह और पारंपरिक व्यंजन
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद अतिथियों को झारखंडी जोहार शॉल और मिथिला पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया गया।
मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चिवड़ा, गुड़, तिलकुट जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने लोगों को अपने घर की याद दिला दी।
सामाजिक समरसता का संदेश
ज्योति होप फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. ज्योति राज ने कहा कि इस तरह के आयोजन प्रदेश से बाहर रह रहे लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में सभी से योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान के साथ हुआ। आयोजन को सफल बनाने में गौतम राज सहित फाउंडेशन के सदस्यों की अहम भूमिका रही।

