22.4 C
Jharkhand
Friday, December 5, 2025

चंदनकियारी: पंचायत मुखियाओं का आंदोलन सातवें दिन भी जारी, वित्तीय स्वायत्तता की मांग तेज

 

चंदनकियारी

प्रखंड कार्यालय के पास पंचायत मुखियाओं का धरना-प्रदर्शन लगातार सातवें दिन भी जारी है। महिला मुखियाएं हाथों में तख्तियां लेकर अपने अधिकारों और विकास कार्यों के लिए आवाज बुलंद कर रही हैं। यह आंदोलन केवल विरोध नहीं, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

मुखियाओं की सबसे बड़ी शिकायत है कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि पिछले दो वित्तीय वर्षों से रुकी हुई है। इससे शौचालय निर्माण, स्ट्रीट लाइट, नाली, सड़क और चापाकल मरम्मत जैसे बुनियादी कार्य ठप पड़े हुए हैं।

पूर्व मुखिया और समाजसेवी शांतिराम ठाकुर ने बताया कि समस्या केवल फंड रोकने की नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था के सम्मान से जुड़ी है।

उन्होंने कहा—

“हमारे पास छोटे-छोटे कामों के लिए भी पैसा नहीं है। जनता रोज सवाल करती है और हम जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। यह जनता और जनप्रतिनिधियों दोनों के साथ अन्याय है।”

एक महिला आदिवासी मुखिया ने कहा कि उन्हें राजनीति में जगह तो मिली, पर अधिकार नहीं।

“मेरे पंचायत में कई योजना के शिलान्यास हो चुके हैं, लेकिन फंड न मिलने से काम शुरू नहीं हो रहा। जनता को लगता है कि हम काम नहीं कर रहे, जबकि सच्चाई सरकार की उदासीनता है।”

मुखिया प्रतिनिधि अनवर अंसारी ने ‘आपकी सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार यह कार्यक्रम अब केवल कागज़ी कार्यवाही और प्रचार तक सीमित होकर रह गया है।

वहीं श्यामपद गोराई ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट के शिलापट्टों में मुखियाओं को शामिल न करना लोकतंत्र का अपमान है।

“बिना मुखिया के गांव का विकास असंभव है। हमें नज़रअंदाज़ करना ग्राम लोकतंत्र का मज़ाक है।”

मुखियाओं की यह लड़ाई केवल फंड की मांग नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज को मजबूत करने और पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय स्वायत्तता दिलाने की लड़ाई बन चुकी है।

मुखियाओं का कहना है कि जब तक स्थानीय निकायों को समय पर पैसा नहीं मिलेगा, गांव का विकास कागज़ों से बाहर नहीं आ पाएगा।

संबंधित स्टोरीज़

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग न्यूज़