पटना : बिहार चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में उथल-पुथल तेज होती जा रही है। इसी बीच सबसे बड़ा धमाका तब हुआ, जब लालू यादव की बेटी और 2022 में पिता को किडनी दान देकर चर्चा में आईं रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और परिवार से रिश्ता तोड़ने का ऐलान कर दिया।
रोहिणी ने 15 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने संजय यादव और रमीज के कहने पर यह कदम उठाया है, और इसकी पूरी जिम्मेदारी वह स्वयं ले रही हैं। इस बयान ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
तेज प्रताप के बयान के बाद और भड़की आग
लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पहले ही पार्टी में हलचल मचा चुके थे। उन्होंने अपने भाई और महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे तेजस्वी यादव को “फेलस्वी” कहते हुए एनडीए की तारीफ कर दी थी।
इस बयान के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा ही था कि रोहिणी का फैसला आरजेडी के भीतर गुटबाज़ी को और गहरा कर गया है।
संजय यादव और रमीज के नाम पर RJD में खलबली
रोहिणी ने जिस संजय यादव और रमीज का उल्लेख किया है, दोनों तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं—
संजय यादव : राज्यसभा सांसद और तेजस्वी के रणनीतिक सलाहकार
रमीज : तेजस्वी के लंबे समय से साथ रहे मित्र
इन नामों के सामने आने से पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह स्पष्ट दिखने लगी है।
रोहिणी का राजनीतिक और पारिवारिक योगदान
रोहिणी आचार्य 2022 में अपने पिता को किडनी दान देकर राष्ट्रीय चर्चा में आईं थीं।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली।
रोहिणी अक्सर परिवार के समर्थन और चुनावी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं, लेकिन अब उनके इस निर्णय ने आरजेडी परिवार की जटिल स्थिति को उजागर कर दिया है।
बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़
महागठबंधन की हार, तेज प्रताप के तीखे बयान और अब रोहिणी के राजनीतिक संन्यास ने आरजेडी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह RJD के लिए चुनौतीपूर्ण दौर की शुरुआत हो सकती है।

