धनबाद:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) में एएनआरएफ–पेयर श्रेणी-B परियोजना पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस परियोजना का विषय है “क्रिटिकल मिनरल्स अन्वेषण एवं स्मार्ट/सतत खनन हेतु अभिनव एवं अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास।” परियोजना का नेतृत्व प्रो. धीरेज कुमार, उपनिदेशक, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद (परियोजना निदेशक) द्वारा किया जा रहा है तथा प्रो. एजाज़ अहमद समन्वयक हैं। इस परियोजना में एनआईटी दुर्गापुर, एनआईटी जमशेदपुर, पटना विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गोरखपुर) और विनोबा भावे विश्वविद्यालय (हजारीबाग) बतौर स्पोक संस्थान शामिल हैं।
कार्यशाला में 150 से अधिक प्राध्यापकों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया। प्रो. राजा वी. रमणी, एमेरिटस प्रोफेसर, पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स अन्वेषण एवं स्मार्ट माइनिंग हेतु स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास की तात्कालिकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा, विद्युत गतिशीलता (ई–मोबिलिटी), इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण तथा रक्षा अनुप्रयोगों की आधारशिला हैं। भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार अनिवार्य है।
इस अवसर पर प्रो. सुकुमार मिश्रा, निदेशक, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने सहयोगात्मक अनुसंधान के माध्यम से संपूर्ण प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रो. धीरेज कुमार ने स्वागत भाषण दिया और प्रो. पार्थसारथी दास, डीन (अनुसंधान एवं विकास), आईआईटी (आईएसएम) ने संस्थागत साझेदारी के महत्व पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, सभी स्पोक संस्थानों के सह–प्रधान अन्वेषकों (Co-PIs) के साथ आयोजित गोलमेज चर्चा में साझा अनुसंधान, अवसंरचना उपयोग, शिक्षक एवं छात्र गतिशीलता तथा उद्योग साझेदारी की रूपरेखा तय की गई।
एएनआरएफ–पेयर कार्यक्रम भारत में अनुसंधान क्षमता को मज़बूत बनाने हेतु “हब–एवं–स्पोक” मॉडल पर आधारित है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में इसका विशेष फोकस क्रिटिकल मिनरल्स और सतत खनन पर है

