
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती कार्रवाइयों को लेकर देश के कई हिस्सों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र, दिल्ली और झारखंड के बाद अब तमिलनाडु, असम, केरल, पुडुचेरी और खास तौर पर पश्चिम बंगाल में ED की छापेमारी चर्चा का विषय बन गई है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले कोलकाता स्थित चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC से जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ED के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। गौरतलब है कि राज्य में विधानसभा चुनाव मई से पहले प्रस्तावित हैं, ऐसे में ED की सक्रियता की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
ED का मुख्य दायित्व आर्थिक अपराधों, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच करना है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि कई राज्यों में चुनावी माहौल के दौरान पुराने मामलों में अचानक तेजी से कार्रवाई हुई। झारखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी चुनाव से ठीक पहले ऐसी ही स्थितियां सामने आ चुकी हैं।
इस साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां ED द्वारा पुरानी फाइलों को दोबारा खोले जाने से राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल चुनावी दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि ED का दावा है कि उसकी हर कार्रवाई कानून के तहत और प्रक्रिया के अनुसार होती है।
चुनावी सरगर्मी के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग लेने की संभावना जताई जा रही है।

