लखनऊ (उत्तर प्रदेश): बिजली चोरी रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल ही में प्रदेश के 3,050 से अधिक स्मार्ट मीटरों में तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद उपभोक्ताओं और विद्युत परिषद ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि इन स्मार्ट मीटरों में छेड़छाड़ और टेंपरिंग जैसे मामले सामने आए हैं। कई जगह मीटर कवर खोले जाने और सील टूटने के सबूत मिले हैं। उन्होंने कहा कि बिजली चोरी रोकने के लिए लागू यह योजना अगर खुद पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रही है, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।
प्रदेश में अब तक 36.44 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 3,050 मीटरों में गंभीर खामियां पाई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमांचल विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में 27,823 मीटरों में “वोल्टेज जीरो” की स्थिति दर्ज की गई है, जबकि उनमें करंट उपलब्ध है — जो तकनीकी दृष्टि से असंभव माना जाता है।
इन मीटरों में से अधिकतर में चीन निर्मित इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उपयोग किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण तकनीकी गड़बड़ियों का प्रमुख स्रोत हो सकता है।
परिषद ने बताया कि जिन कंपनियों के मीटरों में गड़बड़ी मिली हैं, उनमें —
इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. के 2,538 मीटर
जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के 395 मीटर
पोलारिस कंपनी के 39 मीटर
में अनियमितताएं पाई गई हैं।
विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पूरे मामले की जांच के लिए ऊर्जा विभाग और यूपीपीसीएल से विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की मांग की है।
मुख्य बिंदु:
यूपी में लगाए गए 36.44 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर
3,050 मीटरों में तकनीकी खामियां, कई में छेड़छाड़ के संकेत
27,000 से ज्यादा मीटरों में “वोल्टेज जीरो” की असामान्य स्थिति
उच्चस्तरीय जांच की मांग

