
रांची: झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी खबर सामने आई है। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) और निजी क्षेत्र के राज अस्पताल को किडनी ट्रांसप्लांट की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही अब झारखंड के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में भटकना नहीं पड़ेगा।
यह निर्णय शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गठित परामर्शदात्री समिति की बैठक में लिया गया। समिति ने सर्वसम्मति से दोनों अस्पतालों को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दी। जल्द ही दोनों संस्थानों को लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिसके बाद राज्य में किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
इस फैसले से सैकड़ों किडनी रोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। अब मरीजों को दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में इलाज के लिए जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
बैठक में भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों में किडनी, लीवर और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इस विषय पर 15 जनवरी को राज्य के 10 मेडिकल कॉलेजों के साथ एक विशेष बैठक प्रस्तावित है।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत मरीजों को यथासंभव राज्य में ही बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक विशेष पैकेज भी तय किया गया है।
साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लाभुकों का ऑर्गन ट्रांसप्लांट झारखंड में ही किया जाएगा। केवल उन्हीं मरीजों को बाहर भेजा जाएगा, जो इन योजनाओं के दायरे में नहीं आते हैं।
बैठक में अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिवनारायण सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, ध्रुव प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और चिकित्सा विशेषज्ञ मौजूद रहे।
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम झारखंड में सुपर स्पेशियलिटी हेल्थकेयर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और अहम प्रयास माना जा रहा है।

