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Thursday, March 12, 2026

Shibu Soren Death: 7 अहम पड़ावों में जानिए दिशोम गुरु की अंतिम यात्रा और झारखंड की भावनाएं

Shibu Soren Death: झारखंड की राजनीति के दिग्गज और दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर सोमवार को दिल्ली से रांची लाया गया। उनकी निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा के बीच जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पहुंचा, वहां मौजूद हज़ारों समर्थकों की आंखें नम हो गईं। सभी अपने प्रिय नेता की एक अंतिम झलक पाने के लिए बेताब थे।

एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार के सदस्य, झारखंड सरकार के कई मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद थे। एयरपोर्ट के बाहर भी समर्थकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। ‘शिबू सोरेन अमर रहें’ के नारों से पूरा परिसर गूंज रहा था।

जानकारी के अनुसार, शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को सबसे पहले उनके मोरहाबादी स्थित आवास ले जाया गया है, जहाँ से मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर पार्टी कार्यालय ले जाया जाएगा ताकि उनके समर्थक और आम लोग अंतिम दर्शन कर सकें। इसके बाद विधानसभा ले जाया जाएगा, जहां विधायक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद, उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक आवास नेमरा ले जाया जाएगा। यहाँ उनके परिवार और करीबी लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया नेमरा में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आदर्शों और संघर्षों को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।शिबू सोरेन का निधन झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत है। उनके बिना झारखंड की राजनीति की कल्पना करना मुश्किल है। उनके विचार और सिद्धांत हमेशा झारखंड की जनता को प्रेरणा देते रहेंगे।
झारखंड आंदोलन के नायक
शिबू सोरेन ने झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। उनके संघर्ष और समर्पण ने उन्हें ‘दिशोम गुरु’ का दर्जा दिलाया। उन्होंने आदिवासियों के हक के लिए जीवन भर लड़ाई लड़ी। उनकी राजनीतिक यात्रा में तीन बार मुख्यमंत्री का पद और कई बार केंद्रीय मंत्री का पद भी शामिल रहा। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक के रूप में उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

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