
🔹 Highlights
- • धनबाद जिले में डायरिया से छह लोगों की मौत
- • भेलाटांड़ में एक बच्ची की भी गई जान
- • स्वास्थ्य विभाग पांच माह बाद भी कारण तय नहीं कर पाया
- • पानी के सैंपल जांच में मापदंडों के पालन पर सवाल
धनबाद:
धनबाद जिले में डायरिया से हुई मौतों का मामला गंभीर होता जा रहा है। इस वर्ष जिले में डायरिया से छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि भेलाटांड़ इलाके में एक बच्ची ने भी जान गंवाई है। हैरानी की बात यह है कि घटना के पांच महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग बीमारी के ठोस कारणों का पता नहीं लगा पाया है।
पूर्वी टुंडी और सिजुआ क्षेत्र के भेलाटांड़ में करीब 220 लोग डायरिया की चपेट में आए थे। इनमें से पूर्वी टुंडी में छह और भेलाटांड़ में एक बच्ची की मौत हुई। प्रभावित इलाकों में आज भी स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पूर्वी टुंडी के 30 से अधिक गांवों में लोगों को पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मौतों के बाद संबंधित क्षेत्रों के कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाल दिया गया, जिसके बाद पानी के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। इससे जांच रिपोर्ट सामान्य आ गई और यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पानी वास्तव में कितना दूषित था।
घोषालडीह, आदिवासी टोला, भोक्ता टोला और शहरपुरा जैसे गांवों में आज भी पीड़ित परिवारों में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीमारी फैलने के दौरान न तो समय पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और न ही अस्पतालों में समुचित इलाज की व्यवस्था रही। कई परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी तरह की सरकारी सहायता भी नहीं मिली।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पानी और भोजन दोनों की जांच की गई थी, लेकिन डायरिया फैलने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आ सका। विभाग ने आशंका जताई थी कि संभवतः दूषित भोजन या पानी इसकी वजह हो सकता है, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
यह मामला न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठाता है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित पेयजल की स्थिति को भी उजागर करता है।

