Bharat Bandh Dhanbad 2026: 7 बड़ी बातें – बैंक हड़ताल से शहर ठप
Bharat Bandh Dhanbad में गुरुवार को केंद्र सरकार की निजीकरण नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में बैंक कर्मचारियों ने जोरदार हड़ताल की। धनबाद के सभी प्रमुख बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और ग्राहकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
Highlights:
नए श्रम कानूनों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के खिलाफ देशभर में मजदूर संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था, जिसका असर झारखंड के धनबाद में साफ दिखाई दिया। बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक और केनरा बैंक समेत कई बैंकों में ताले लटके रहे।
Bharat Bandh Dhanbad में क्यों हुई बैंक हड़ताल?
बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार की निजीकरण नीति से सार्वजनिक बैंकों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। साथ ही, नई श्रम संहिताएं कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं। इसी वजह से कर्मचारियों ने Bharat Bandh Dhanbad के तहत काम बंद कर सड़कों पर उतरकर विरोध जताया।
Bharat Bandh Dhanbad का आर्थिक असर
इस बंद का सीधा असर धनबाद की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा। करोड़ों रुपये का लेनदेन अटक गया, चेक क्लियरेंस रुके रहे और व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ा। बैंक शाखाओं के बाहर लंबी लाइनें और परेशान ग्राहक नजर आए।
Bharat Bandh Dhanbad: सड़कों पर प्रदर्शन
रणधीर वर्मा चौक और अन्य प्रमुख इलाकों में CITU और AICCTU के बैनर तले मजदूर संगठनों ने प्रदर्शन किया। इससे यातायात व्यवस्था घंटों बाधित रही और आम लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।
Bharat Bandh Dhanbad में कर्मचारियों की मांगें
- कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगें हैं:
- सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण बंद हो
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए
- आउटसोर्सिंग सिस्टम खत्म हो
- श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी प्रावधान हटाए जाएँ
नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए श्रम कानूनों से जुड़ी सरकारी जानकारी देखें:

